एमसीबी में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा पर भाजपा ने डाला डाका_गुलाब कमरो

यात्रा में साहित्यकारों और कलाकारों की जगह भाजपा जिला अध्यक्ष का नाम होने पर जताई आपत्ति

सतेन्द्र गुप्ता 

मनेंद्रगढ़/एमसीबी - सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा को लेकर एमसीबी जिले की राजनीति गरमा गई है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा पर सरकारी गाइडलाइन की अनदेखी कर यात्रा को राजनीतिक मंच बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

कमरो ने कहा कि शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि यात्रा में जिले की माटी, पानी, लोक कला, संस्कृति और इतिहास के विशेष जानकारों, साहित्यकारों एवं कलाकारों को प्राथमिकता दी जानी थी। लेकिन इन योग्य व्यक्तियों को दरकिनार कर भाजपा से जुड़े नेताओं और पदाधिकारियों को शामिल किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एमसीबी जिले कि भाजपा जिला अध्यक्ष चंपा देवी पावले ने अपनी ही सरकार के नियमों और गाइडलाइन को ताक पर रखकर साहित्यकारों एवं कलाकारों की जगह स्वयं अपना नाम तथा भाजपा पदाधिकारियों के नाम शामिल करवा लिया। 

कमरो ने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या अब भाजपा जिला अध्यक्ष अपनी ही सरकार से भी बड़ी हो गई हैं? 

यदि सरकार की गाइडलाइन का पालन नहीं होगा तो फिर नियम-कानून केवल आम जनता के लिए ही क्यों?"

पूर्व विधायक ने कहा कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि उन पात्र व्यक्तियों के अधिकारों का हनन है जिन्हें इस यात्रा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने राजनीतिक हितों के लिए सरकारी योजना का दुरुपयोग किया और वास्तविक हकदारों का अधिकार छीन लिया।

कमरो ने भाजपा के "सबका साथ, सबका विकास" के नारे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि हर सरकारी योजना में भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी, तो यह नारा केवल दिखावा बनकर रह जाएगा।

उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। धार्मिक आयोजनों और सरकारी योजनाओं का राजनीतिक लाभ लेने के लिए दुरुपयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में शासन की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

पूर्व विधायक ने कहा कि सरकारी योजनाओं को भाजपा का राजनीतिक कार्यक्रम बनाने की प्रवृत्ति लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए चिंताजनक है। धर्म और आस्था के नाम पर सरकारी संसाधनों का राजनीतिक उपयोग तत्काल बंद होना चाहिए।