अवैध रेत खनन के खिलाफ फूटा आक्रोश: हरचौका में 30 मई से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन की चेतावनी, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

सतेन्द्र गुप्ता 
 
​एमसीबी (छत्तीसगढ़)। ग्राम पंचायत हरचौका स्थित मवई नदी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत उत्खनन और पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। जिला पंचायत सदस्य (क्षेत्र क्रमांक 01, भरतपुर) एवं स्थाई वन समिति की सभापति अनीता चौधरी के नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) भरतपुर को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

​ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन द्वारा 48 घंटे के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो *30 मई 2026 से स्थानीय जनसमुदाय द्वारा उग्र एवं अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।*
*​नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार कर रहा मनमानी*
​एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में सजग नागरिकों की ओर से खनन ठेकेदार द्वारा की जा रही गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया गया है:
*​भारी मशीनों का अवैध उपयोग:* स्वीकृत लीज शर्तों के विपरीत, मवई नदी का सीना चीरने के लिए पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह प्रतिबंधित है।
*​क्षेत्रफल का अतिक्रमण:* आवंटित लीज के निर्धारित रकबे से कहीं अधिक व्यापक क्षेत्र में अवैध रूप से खनन कार्य फैला दिया गया है।
*​ओवरलोडिंग से भारी क्षति:* नियमों को ताक पर रखकर रेत का ओवरलोड परिवहन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
*​स्थानीय रोजगार पर डाका:* स्थानीय श्रमिकों को रोजगार देने के बजाय भारी मशीनों का उपयोग कर स्थानीय ग्रामीणों के आर्थिक हितों पर कुठाराघात किया जा रहा है।

​जनहित में प्रमुख माँगें
​ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित प्रमुख माँगें रखी हैं:
""​तत्काल प्रभाव से पोकलेन और जेसीबी मशीनों का उपयोग बंद कर उन्हें जब्त (राजसात) किया जाए।
""​रेत उत्खनन का कार्य केवल निर्धारित समयावधि प्रातः 06:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक ही किया जाए।
""​भारी मशीनों के स्थान पर स्थानीय लोगों द्वारा रेत की खुदाई कराई जाए ताकि स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।
""​राजस्व एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम गठित कर आवंटित क्षेत्रफल की नापी व गहराई की पैमाइश कराई जाए और लीज से अधिक किए गए अवैध उत्खनन की वसूली की जाए।
""​अवैध खनन से हुए राजस्व नुकसान का आकलन कर ठेकेदार पर भारी अर्थदंड (Penalty) अधिरोपित कर रिकवरी की जाए।

​48 घंटे का अल्टीमेटम: 'कुछ भी अप्रिय हुआ तो जिम्मेदारी प्रशासन की'
​जिला पंचायत सदस्य अनीता चौधरी ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि पर्यावरण सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को 48 घंटे के भीतर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस समयावधि में उचित दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो 30 मई से होने वाले उग्र आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए पूर्ण रूप से *स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा।*
​इस ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर), पुलिस अधीक्षक (एसपी), जिला खनिज अधिकारी और थाना प्रभारी भरतपुर को भी आवश्यक और त्वरित कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।