बिजुरी हत्याकांड में खूनी खेल: अब इकलौते चश्मदीद गवाह की भी संदिग्ध मौत, सबूत मिटाने की साजिश या खाकी की नाकामी?


बिजुरी।
अनूपपुर जिले के बिजुरी में 20 मई 2026 को हुए युवती हत्याकांड ने अब एक ऐसा खौफनाक और संदेहास्पद रूप ले लिया है, जिससे कानून-व्यवस्था और पुलिस की नीयत पूरी तरह बेनकाब हो गई है। इस अमानवीय हत्याकांड के इकलौते चश्मदीद गवाह की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है।
गवाह की मौत ने यह साफ कर दिया है कि इस हत्याकांड के पीछे किसी बहुत बड़े और रसूखदार सिंडिकेट का हाथ है, जो सबूतों को मिटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे शर्मनाक भूमिका बिजुरी पुलिस और जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) की नजर आ रही है, जिनकी थ्योरी पहले दिन से ही सवालों के घेरे में है।

*खाकी के 3 बड़े 'पाप': क्यों शक के घेरे में है पुलिस की भूमिका?*

1. *बिना पोस्टमार्टम 'क्लीन चिट' — साहब को किस बात की जल्दी थी?*
घटना के तुरंत बाद, बिना किसी शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट या फॉरेंसिक साक्ष्य के, जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) ने मीडिया के सामने आकर बयान दे दिया कि "युवती के साथ बलात्कार नहीं हुआ है।"
बड़ा सवाल: एक जिम्मेदार आईपीएस अधिकारी बिना मेडिकल रिपोर्ट के इतनी बड़ी थ्योरी कैसे दे सकता है? क्या यह बयान अपराधियों को पहले ही सुरक्षित रास्ता देने और मामले को भटकाने के लिए दिया गया था?
2. *गवाह मौजूद था, फिर 'अंधी हत्या' का ड्रामा क्यों?*
शुरुआत से ही इस मामले में चश्मदीद गवाह मौजूद था, जो आरोपियों को बेनकाब कर सकता था। इसके बावजूद बिजुरी पुलिस लगातार इसे 'अंधी हत्या' (Blind Murder) बताकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश करती रही। पुलिस ने गवाह को सुरक्षा देने के बजाय मामले को उलझाया, और आज नतीजा सबके सामने है—गवाह की लाश मिली है!
3. *प्रेस नोट में गोलमोल बातें — आखिर क्या छुपा रही है पुलिस?*
पुलिस द्वारा जारी अधिकारिक प्रेस नोट में युवती की मौत की वजह को पूरी तरह से गोलमोल रखा गया। मौत का कारण स्पष्ट न करना और तथ्यों को छुपाना यह साबित करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

*गवाह की मौत के बाद सुलगते सवाल: अब जवाब दे पुलिस!साजिश या हत्या?*

 जिस चश्मदीद गवाह के दम पर मृतका को न्याय मिल सकता था, उसकी संदिग्ध मौत का जिम्मेदार कौन है? क्या अपराधियों को पुलिस का कोई खौफ नहीं था?जब पुलिस को पता था कि मामला हाईप्रोफाइल और संवेदनशील है, तो चश्मदीद गवाह को पुलिस प्रोटेक्शन क्यों नहीं दिया गया? क्या पुलिस खुद चाहती थी कि गवाह रास्ते से हट जाए?

*किसके दबाव में हैं कप्तान?* बिना पीएम रिपोर्ट के बलात्कार न होने का दावा करने वाले एसपी साहब, क्या अब गवाह की मौत को भी 'सामान्य मौत' या 'आत्महत्या' बताकर फाइल बंद कर देंगे?

*न्याय का जनाजा या खाकी का आत्मसमर्पण?*

बिजुरी में पहले बेटी की अस्मत और जान लूटी गई, और अब न्याय की आखिरी उम्मीद यानी चश्मदीद गवाह को भी रास्ते से हटा दिया गया। बिजुरी पुलिस की संदेहास्पद कार्यप्रणाली और ढुलमुल रवैये ने अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद कर दिए हैं कि वे अब खुलेआम गवाहों को ठिकाने लगा रहे हैं।
यदि इस पूरे मामले की तुरंत उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच (CBI या SIT) नहीं कराई गई और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो जनता का कानून से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। बिजुरी पुलिस अब जवाब दे—आखिर यह खूनी खेल किसके इशारे पर खेला जा रहा है?