सरकारी कार्रवाई या गुंडागर्दी
विद्युत वितरण केंद्र गोहपारू की कार्यशैली पर ग्रामीणों ने उठाए गंभीर प्रश्न
शहडोल - मलमाथर क्षेत्र बिजली बिल वसूली को लेकर एक बार फिर विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि श्री निवास पटेल के नेतृत्व में पहुंची वसूली टीम के साथ कई ऐसे स्थानीय एवं कथित प्राइवेट लोग मौजूद थे, जो विभाग के नियमित कर्मचारी नहीं बताए जा रहे। इस पूरी कार्रवाई के बाद गांव में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बिल वसूली के नाम पर कुछ लोग घरों में जबरन प्रवेश करने, डराने-धमकाने तथा सामान जब्ती का दबाव बनाने जैसी गतिविधियां करते दिखाई दिए। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या किसी सरकारी विभाग को इस प्रकार बाहरी लोगों के सहारे कार्रवाई करने की अनुमति है?
क्षेत्रीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि विभाग के साथ घूम रहे कुछ व्यक्तियों का कोई सार्वजनिक चरित्र सत्यापन सामने नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, ऐसे लोगों की पहचान और नियुक्ति को लेकर विभाग कभी स्पष्ट जानकारी नहीं देता। यही कारण है कि गांव में महिलाओं और बुजुर्गों के बीच असुरक्षा और भय का वातावरण बनता जा रहा है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विभाग की कार्रवाई अक्सर उन्हीं उपभोक्ताओं के खिलाफ ज्यादा सख्त दिखाई देती है, जो बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग, खराब व्यवस्था या विभागीय अनियमितताओं की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाते हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि आम उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय दबाव बनाकर वसूली को प्राथमिकता दी जा रही है।
अब क्षेत्र की जनता प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग कर रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि वसूली टीम के साथ मौजूद लोग अधिकृत कर्मचारी थे या निजी व्यक्ति। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी कार्रवाई के नाम पर भय का वातावरण बनाया जाएगा, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है —
क्या बिजली विभाग जनता की सेवा के लिए है, या फिर आम नागरिकों पर दबाव बनाने का माध्यम बनता जा रहा है


