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📅 26 May 2026, 1:56 PM🕐 1 घंटे पहले⏱ पढ़ने का समय: 1 मिनट
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खबर प्रकाशन कें बाद बौखलाये उपयंत्री मनोज शुक्ला
आवेदक कें आवेदन पर कब होगीं अधिकारियों की नजर
शहडोल- इन दिनों जनपद पंचायत जयसिंहनगर के दो उपयोग यांत्रिक मनोज शुक्ला एवं हेमेंद्र पतले समाचार पत्र में सुर्खियां बटोरने में लगे हुए हैं उनके कार्य क्षेत्र में कार्य की जांच की मांग शायद इन्हें परेशानियों में डालता नजर आ रहा है क्योंकि इनके द्वारा ग्राम पंचायत के कार्यों में अपनी सहभागिता किस आंदोलन से दी गई यह किसी से नहीं छुपा है इनकी कहानी अगर लिखी जाए तो कई किताबें बन सकती है इनके द्वारा लापरवाही अपने कार्यक्षेत्र में खुलेआम की जा रही है और इस पर जहां उच्च अधिकारियों को लगाम कश्मीर चाहिए पर लगाम की जगह की इन्हें और खुली छूट दे दी गई है।
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खबर से बौखलाया उपन्यत्री
आवेदक द्वारा जब जनपद पंचायत जैसीनगर के मुख्य कार्य के पास आवेदन कर संबंधित उपयंत्री के कार्य क्षेत्र में हुए कार्यों की जांच अपने समक्ष कराने हेतु निवेदन किया गया, किंतु एक माह बीतने के बाद भी आवेदन ठंडे बस्ते में हीं पड़ा रहा। जिसके बाद आवेदक द्वारा पुन स्मरण पत्र के माध्यम से आवेदन कर पुन उसी विषय की जांच के लिए सात दिवस का अवसर प्रदान किया गया, लेकिन आज दिनांक तक कार्यवाही शून्य दिखाई दे रही है जब इन विषयों को लेकर खबर प्रशासन की झड़ी लगी तो उपयंत्री मनोज शुक्ला बौखलाते हुए आस्तीन का सांप वाली कहावत सामने वाले के लिए कह डाली, जबकि वास्तव में यह कहावत किस पर लागू होती है उस पर जिसे शासन ने सही कार्य करवाने हेतु जिम्मेदारी दी है किंतु उनके द्वारा उस जिम्मेदारी को बखूबी नहीं निभा पा रहे। जिसके लिए शासन वेतन भुगतान करती है या फिर उस सामने वाले पर जो इनकी जिम्मेदारी पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है क्योंकि अगर इनके द्वारा अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाई जाती तो जांच का प्रश्न कैसे उठाता और जब इनके द्वारा क्षेत्र में सही कार्य कराया गया है तो फिर डर किस बात का है क्योंकि लोगों को पता है कि इनके द्वारा अपने क्षेत्र में कार्य किस प्रकार से कराया जाता है पब्लिक है ये सब जानती है क्या एक जिम्मेदार उपयंत्री को ऐसे शब्दों का उपयोग करना चाहिए इनका यह शब्द केवल इन पर ही नहीं अपितु जनपद से लेकर जिला पंचायत की स्थिति दर्शाता है कि उस विभाग में कितने सभ्य लोग हैं उनके द्वारा कहावत तो व्यवस्थित कर दिया गया पर इसका अर्थ इन्हें कितनी बखूबी से पता है वह वही बता सकते हैं।
सूचना अधिकार अधिनियम जनपद में बना दिखावा
सूचना अधिकार अधिनियम इसलिए बनाया गया है कि हर व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए और इसकी एक सीढी बनाई गई है जिससे आवेदन करने वाले को सही समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। किंतु क्या जनपद पंचायत जयसिंहनगर में ऐसा हो रहा है जब दोनों उपयंत्रियों का इन्हीं के कार्य क्षेत्र एवं उनसे जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जनपद में आवेदन कर चाही गई । किंतु वही हिमेंद्र पटलेद्वारा अपनी गलती को ग्राम पंचायत पर थोपने का काम किया जा रहा है। जहां अपने बचाव में उनके द्वारा यह कहा जा रहा है कि दस्तावेज ग्राम पंचायत में जमा है जब जानकारी इनसे मांगी जा रही है और इनसे संबंधित है तो इन्हें उपलब्ध कराना चाहिए। अब देखना है यह बाकी है की प्रथम अपीलीय अधिकारी क्या समय सीमा में जानकारी प्रदान करवा पाएंगे।