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शाहपुर में अतिथि शिक्षक भर्ती पर बड़ा घमासान! एक आवेदन में जल्द भर्ती की मांग, दूसरे में विसंगति पूर्ण भर्ती को सुधार कर जांच पूरी होने तक रोक की मांग
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कैलाश अहिरवार
राजनीति
📅 01 Aug 2026, 12:54 PM🕐 01 Aug 2026⏱ पढ़ने का समय: 1 मिनट
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शाहपुर में अतिथि शिक्षक भर्ती पर बड़ा घमासान! एक आवेदन में जल्द भर्ती की मांग, दूसरे में विसंगति पूर्ण भर्ती को सुधार कर जांच पूरी होने तक रोक की मांग
भर्ती घोटाले पर रोक की मांग से घबराए गत वर्ष कार्यरत फर्जी अतिथि शिक्षक
उमरिया/पाली।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर की अतिथि शिक्षक भर्ती अब केवल नियुक्ति का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुराने भर्ती विवाद, जांच रिपोर्ट और पारदर्शिता की लड़ाई का केंद्र बन गई है। एक ही भर्ती प्रक्रिया को लेकर दो विपरीत आवेदन सामने आने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
जहां इस डर से कि कहीं साफ सुथरा भर्ती होने पर उन्हें बाहर न कर दिया जाए पूर्व में कार्यरत घबराए कुछ अतिथि शिक्षकों ने कलेक्टर उमरिया को आवेदन देकर तत्काल भर्ती कराने की मांग की है और बिना आधार पुराने पैनल के अभ्यर्थी को ब्लैकलिस्टेड बताते हुए बिना तथ्य को जाने समझे देरी के लिए विद्यालय प्रबंधन को जिम्मेदार बताया है, जबकि प्राप्त जानकारी अनुसार उनके पास ऐसी कोई ब्लैक लिस्टेट सूची नहीं है। वहीं पात्र अभ्यर्थी दिलीप कुमार द्विवेदी ने 8 जुलाई 2026 को दिए आवेदन में दावा किया है कि सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों और 13 नवंबर 2025 की जांच रिपोर्ट में पूर्व की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख है। उन्होंने मांग की है कि पहले उन विसंगतियों का निराकरण किया जाए, उसके बाद ही वर्तमान भर्ती की जाए।
मामले का सबसे चर्चित पहलू यह है कि एक पक्ष तत्काल भर्ती चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष कह रहा है कि यदि बिना जांच में सामने आए मुद्दों का समाधान किए भर्ती हुई तो फिर वही विवाद दोहराया जाएगा। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भर्ती में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है, जबकि पूर्व की प्रक्रिया पर ही सवाल उठ चुके हैं।
दिलीप कुमार द्विवेदी का आरोप है कि उनके आवेदन पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण भर्ती प्रक्रिया उलझती चली गई। उनका कहना है कि शासन के नियमों, वैध पैनल और जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष निर्णय होना चाहिए, ताकि सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।
अब पूरा मामला सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग उमरिया और जिला प्रशासन के सामने है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्णय जल्दबाजी में होगा या उपलब्ध रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और नियमों के आधार पर पारदर्शी तरीके से लिया जाएगा।
शाहपुर अतिथि शिक्षक भर्ती में दो आवेदन आमने-सामने: एक ओर तत्काल भर्ती की मांग, दूसरी ओर पहले अनियमितताओं के सुधार की मांग
दोनों आवेदनों के बीच मुख्य विरोधाभास और मुद्दे निम्न बिंदुओं में समझे जा सकते हैं:
(1)पहला आवेदन (पूर्व में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का)
(2)तत्काल भर्ती कराने की मांग करता है।
भर्ती में देरी का कारण विद्यालय प्रबंधन और एसएमडीसी बैठकों में विवाद बताया गया है।
छात्र-छात्राओं की पढ़ाई और अतिथि शिक्षकों की आर्थिक स्थिति का हवाला दिया गया है।
(3)दूसरा आवेदन (दिलीप कुमार द्विवेदी का)
पहले पूर्व की भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं का निराकरण करने की मांग करता है।
--सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों और 13.11.2025 की जांच रिपोर्ट जो कि अतिथि शिक्षक भर्ती अनियमितता/फर्जी भर्ती का उल्लेख करता है।
--09.07.2019 के वैध पैनल और शासन के नियमों के अनुसार भर्ती की मांग करता है।
मुख्य विरोधाभास
(1)एक पक्ष कहता है कि पहले भर्ती हो।
(2)दूसरा पक्ष कहता है कि पहले कथित (3)अनियमितताओं का समाधान हो, फिर भर्ती हो।(4)दिलीप कुमार द्विवेदी का आरोप
उनके आवेदन पर समय पर निर्णय नहीं लिया गया।इससे भर्ती प्रक्रिया लंबित होती चली गई।
दिलीप द्विवेदी के द्वारा दिए गए 8.7.2026 के आवेदन से उठने वाला प्रश्न
(1)यदि पूर्व की भर्ती में अनियमितताओं की शिकायत और जांच रिपोर्ट मौजूद है, तो क्या उन्हें निपटाए बिना भर्ती करना उचित होगा?
(2)भर्ती रोकना नहीं, बल्कि शासन के नियमों के अनुसार पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित करना।
प्रशासन के सामने मुख्य प्रश्न
(1)क्या पहले जांच रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर कथित विसंगतियों का निराकरण किया जाएगा?
(2)या बिना उन बिंदुओं पर निर्णय लिए बिना सीधे भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी?