शाहपुर अतिथि शिक्षक भर्ती पर घमासान: पूर्व पैनल अभ्यर्थी को बैठक से बाहर करने का आरोप, जांच रिपोर्ट छिपाने पर भी उठे सवाल
SMDC बैठक में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल; अभ्यर्थी ने सहायक आयुक्त से 10 बिंदुओं पर जांच और भर्ती प्रक्रिया पर रोक की मांग की
उमरिया/पाली। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर, विकासखंड पाली में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व पैनल के अभ्यर्थी दिलीप कुमार द्विवेदी ने सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग उमरिया श्रीमती पूजा द्विवेदी को शिकायत प्रस्तुत कर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव, अपना पक्ष रखने से रोके जाने, SMDC सदस्यों को पूर्व में प्रस्तुत आवेदन एवं जांच प्रतिवेदन की जानकारी नहीं दिए जाने सहित कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
दिलीप कुमार द्विवेदी के अनुसार उन्होंने 8 जुलाई 2026 को विद्यालय में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अपनी आपत्ति एवं पक्ष को संज्ञान में लेने तथा नियमानुसार पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का अनुरोध किया था। इसके अलावा उन्होंने 13 जुलाई 2026 को सहायक आयुक्त तथा 7 जुलाई 2026 को कलेक्टर उमरिया को भी आवेदन प्रस्तुत किया था।
29 जुलाई की SMDC बैठक में बाहर किए जाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक 29 जुलाई 2026 को विद्यालय में SMDC की बैठक आयोजित की गई थी। द्विवेदी का कहना है कि वे लगभग 11 बजे बैठक प्रारंभ होने के समय विद्यालय पहुंचे और अपने पक्ष एवं आपत्ति को SMDC के समक्ष रखने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बैठक से बाहर कर दिया गया।
उनके अनुसार जब उन्होंने प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते से इसका कारण पूछा तो उन्हें SMDC सचिव से बात करने को कहा गया। शिकायत में आरोप है कि SMDC सचिव श्रीमती अरविंद निशा बेगम ने बैठक की कार्यवाही को गोपनीयता का विषय बताते हुए उन्हें बैठक में बैठने की अनुमति नहीं दी।
द्विवेदी का सवाल है कि जब वे संबंधित भर्ती प्रक्रिया के अभ्यर्थी हैं, पूर्व पैनल में उनका नाम रहा है और उन्होंने लिखित रूप से अपनी आपत्ति भी प्रस्तुत की है, तो उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना बैठक से बाहर रखना किस प्रकार पारदर्शी प्रक्रिया मानी जा सकती है?
डेढ़ बजे सामने आया दूसरा घटनाक्रम, फिर मिला पक्ष रखने का अवसर
शिकायत के अनुसार लगभग 1:30 बजे, बैठक की कार्यवाही पूरी होने के बाद उच्च माध्यमिक शिक्षक श्री तरुणेश झा को कार्यवाही रजिस्टर में हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया गया। द्विवेदी का दावा है कि श्री झा ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रक्रिया वैधानिक एवं नियमानुसार नहीं हो रही है तथा पूर्व की तरह गलत प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
इसके बाद श्री झा द्वारा द्विवेदी को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक इसके बाद उन्हें SMDC के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिला और उन्होंने पूर्व पैनल से संबंधित प्रमाण, 8 जुलाई का आवेदन, पूर्व जांच प्रतिवेदन तथा अन्य संबंधित दस्तावेज SMDC के समक्ष प्रस्तुत किए।
SMDC सदस्यों को आवेदन की जानकारी नहीं होने का दावा
द्विवेदी के अनुसार उन्होंने SMDC सदस्यों से पूछा कि क्या उनके द्वारा 8 जुलाई को विद्यालय में प्रस्तुत आवेदन की जानकारी उन्हें दी गई थी। शिकायत में दावा किया गया है कि उपस्थित सदस्यों ने आवेदन की जानकारी नहीं होने की बात कही।
शिकायतकर्ता के मुताबिक SMDC सदस्यों ने यह भी बताया कि उन्हें अतिथि शिक्षक भर्ती के नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसी दौरान उन्होंने SMDC सचिव श्रीमती अरविंद निशा बेगम से पूर्व अतिथि शिक्षक भर्ती से संबंधित जांच रिपोर्ट के बारे में पूछा। शिकायत के अनुसार सचिव ने भी जांच रिपोर्ट की जानकारी होने से इनकार किया।
दस्तावेजों पर नहीं मिला ठोस जवाब देने का आरोप
दिलीप कुमार द्विवेदी का कहना है कि उन्होंने अपने आवेदन एवं आपत्तियों के समर्थन में सभी संबंधित दस्तावेज SMDC के समक्ष रखे। उन्होंने प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते एवं SMDC सचिव/सदस्यों से संबंधित तथ्यों पर उनका पक्ष भी पूछा, लेकिन उनके अनुसार प्रस्तुत दस्तावेजों एवं कथित अनियमितताओं के संबंध में कोई ठोस दस्तावेजी उत्तर या स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
शिकायत के अनुसार इसके बाद SMDC सचिव ने यह कहते हुए बैठक स्थगित कर दी कि “सीनियर झा सर हैं, उन्हें भर्ती के बारे में ज्यादा नियम पता हैं, मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।”
‘अगर झा सर नहीं होते तो दस्तावेज SMDC तक पहुंचते ही नहीं’
द्विवेदी ने अपनी शिकायत में कहा है कि यदि श्री तरुणेश झा द्वारा उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया जाता तो उनके द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं आपत्तियां SMDC के समक्ष रखी ही नहीं जा सकती थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस आवेदन को उन्होंने 8 जुलाई को विद्यालय में विधिवत प्रस्तुत किया था, उसकी जानकारी SMDC सदस्यों को नहीं दी गई। इसी प्रकार पूर्व अतिथि शिक्षक भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं से संबंधित जांच रिपोर्ट भी SMDC के संज्ञान में नहीं होने की बात सामने आई। शिकायतकर्ता के अनुसार इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं नियमानुसार कार्यवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
‘SMDC की सहमति नहीं है’ कहकर बाहर करने पर भी सवाल
द्विवेदी का कहना है कि उन्हें बैठक से बाहर करते समय श्री सिंह परस्ते और श्रीमती अरविंन निशा बेगम यह बताया गया कि SMDC की सहमति नहीं है, लेकिन बाद में उन्हीं की उपस्थिति में SMDC सदस्यों एवं वरिष्ठ उच्च माध्यमिक शिक्षक श्री तरुणेश झा द्वारा उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। शिकायतकर्ता ने इसे प्रारंभिक तौर पर उन्हें बैठक से बाहर रखने के निर्णय की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करने वाला घटनाक्रम बताया है। उन्होंने जांच रिपोर्ट किया आधार पर दावा किया है कि पिछले वर्ष तक अतिथि शिक्षक भर्ती अनियमितता रही है। और भर्ती विसंगति में सुधार हेतु आवेदन दिए थे। लेकिन प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते द्वारा कूट रचित तरीके से पुनः वर्तमान सत्र में भर्ती किए जाने का कुप्रयास किया गया। 8 जुलाई का आवेदन एवं जांच रिपोर्ट सहित भर्ती प्रक्रिया की शासन के दिशा निर्देश को प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते द्वारा एसएमडीसी से छुपाया गया एसएमडीसी सचिव और सदस्यों ने भी बताया कि इसकी कोई जानकारी नहीं है।
सहायक आयुक्त से 10 बिंदुओं पर जांच की मांग
दिलीप कुमार द्विवेदी ने सहायक आयुक्त श्रीमती पूजा द्विवेदी से पूरे मामले में 10 बिंदुओं पर जांच एवं कार्रवाई की मांग की है। इनमें 29 जुलाई की SMDC बैठक की संपूर्ण कार्यवाही, उपस्थिति पत्रक एवं कार्यवाही रजिस्टर की प्रमाणित प्रति की जांच, 8 जुलाई के आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई तथा पूर्व जांच प्रतिवेदन में सामने आई अनियमितताओं की वर्तमान भर्ती प्रक्रिया से तुलना शामिल है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि यह जांच की जाए कि उनके आवेदन एवं पूर्व जांच प्रतिवेदन की जानकारी SMDC सदस्यों को क्यों नहीं दी गई तथा उन्हें भर्ती संबंधी नियमों की जानकारी क्यों नहीं थी।
इसके अलावा पूर्व पैनल के संबंधित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने का उचित अवसर देने, उनके दस्तावेजों एवं आपत्तियों की जांच पूरी होने तक भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं देने, प्रभारी प्राचार्य द्वारा उन्हें बैठक से बाहर किए जाने के मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि जांच में नियमों की अवहेलना, तथ्य छिपाने, दस्तावेजों की अनदेखी अथवा किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का प्रयास सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।
द्विवेदी ने आवश्यकता पड़ने पर वर्तमान अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक विवादित भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं देने की भी मांग की है। साथ ही उन्होंने अपने द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं आपत्तियों को अभिलेख पर लेते हुए की गई कार्रवाई से उन्हें लिखित रूप से अवगत कराने का अनुरोध किया है।
‘उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित कराना’
शिकायतकर्ता दिलीप कुमार द्विवेदी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करना नहीं है, बल्कि अतिथि शिक्षक भर्ती जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में नियम, पारदर्शिता, निष्पक्षता और योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित कराना है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि श्री सिंह परस्ते के कार्यकाल में जब पिछले वर्ष तक अतिथि शिक्षक भर्ती अनियमितता सहित कई अन्य अनियमिताएं भी जांच में उजागर हुई है तो उन्हें ही प्राचार्य पद का प्रभार क्यों दिया गया है श्री सिंह परस्ते के कार्यकाल में विगत कई वर्षों से परीक्षा परिणाम भी बेहद निराशाजनक रहा है जबकि वहां स्टाफ में दो दो उच्च माध्यमिक शिक्षक हैं। आखिर अधिकारियों के ऊपर ऐसा कौन सा दबाव है जिसके कारण प्राचार्य पद पर प्रभार के विषय में वह स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। जबकि श्री सिंह परस्ते द्वारा बार-बार नियम विरुद्ध अधिक शिक्षक भर्ती करने का जानबूझकर प्रयास किया जाता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सहायक आयुक्त एवं संबंधित विभाग इस शिकायत में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर कराता है तथा शाहपुर की अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई होती है।



