सभ्य राष्ट्र सशक्त राष्ट्र और लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना भारत में कैसे
लाल बहादुर सिंह नेटी विंध्य प्रभारी भारत आदिवासी पार्टी मध्य प्रदेश
इस मुल्क की आजादी के समय जो सपने देखे गए थे आजादी के 79 साल के बाद भी और संविधान के 77 वर्ष लागू होने के बाद भी वे सपने पूरे नहीं हो पाए क्यों हमारा देश हजारों वर्षों से मनुवादी व्यवस्था अर्थात गैर बराबरी की व्यवस्था का शिकार है जिसमें समाज को असमानता के आधार पर बांटा गया है अर्थात सबका स्थान निश्चित कर दिया गया है जो बच्चा उच्च वर्ग में पैदा होता है वह हमेशा के लिए उच्च हो जाता है और जो बच्चा निम्न वर्ग में पैदा होता है वह हमेशा के लिए निम्न हो जाता है अर्थात हमारे भारतीय समाज में आदमी का मूल्य उसके कर्म के आधार पर नहीं बल्कि उसके जन्म के आधार पर निश्चित होता है या तय होता है
सन 1757 से हमारे देश में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ पश्चिम बंगाल से बगावत शुरू हुई और सन 1947 में हमें आजादी मिली इस समय काल के दौरान हम देखते हैं कि इस आंदोलन में हमारे देश के सभी वर्गों के लोगों ने भाग लिया था इस स्वतंत्रता संग्राम में सभी लोगों की सेवाएं ली गई सभी जाति और धर्म के लोगों ने जबरदस्त कुर्बानियां दी
आजादी के बाद जब भारत का संविधान लागू हुआ तो जो गैर बराबरी की व्यवस्था थी उसे हटाने का प्रयास किया गया लेकिन अभी तक उसमें सफलता नहीं मिल पाई हमारा संविधान दुनिया के बेहतरीन संविधानों में से एक है उसकी प्रस्तावना में ही उन सारी बातों का समावेश किया गया है जिससे एक सभ्य राष्ट्र सशक्त राष्ट्र और लोक कल्याण कारी राज्य की स्थापना किया जा सकता है संविधान के भाग 3 में मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है और भाग 4 में नीति निर्देशक तत्वों का उल्लेख किया गया है संविधान में देश के हर नागरिक को हक अधिकार प्रदान किए गए ऐसी संरचना बनाने की कोशिश की गई है जो आगे की सोच रखता है एक ऐसे देश का निर्माण जो सामान्य पर आधारित हो जो सभी को साथ लेकर चलने की बात करें सभी नागरिकों को अवसर की समता हो सभी को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय मिले आपस में भाईचारा और बंधुत्व का निर्माण हो संविधान निर्माण करने वाले लोगों की यही सोच थी
आजादी के बाद हमारे देश में इस बात का भी संघर्ष चल रहा है कि हम किस सोच के मुताबिक मुल्क को आगे बढ़ाएंगे गैर बराबरी व्यवस्था के विचारों के लोग सोचते हैं की मुल्क उनके अनुसार ही चले लेकिन जो समता को मानने वाले लोग और संविधान को मानने वाले लोग चाहते हैं कि देश की हर व्यवस्थासमता के आधार पर और संविधान के अनुसारनिर्माण किया जाए क्योंकि यह लड़ाई हमारे महापुरूषों ने बड़ी मेहनत से लड़ाई लड़ी उसमें बाबा साहब अंबेडकर प्रमुख हैं अभी हमने इस लड़ाई को नहीं जीता है हाल के वर्षों में ऐसा लग रहा है की जो हम लोगों ने हासिल किया था वह कहीं छूटता जा रहा है ऐसा लगता है कि हम हर रहे हैं उसकी जो मौलिक कठिनाई है उसे हमें समझना होगा हमारा संविधान संपूर्ण प्रभु संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य अर्थात लोक कल्याणकारी राज की बात करता है जिसमें सभी धर्म को बराबर की नजरों से देखने का प्रावधान है सभी को देश की संसाधन संपत्तियों पर संख्या के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित की गई है शासन प्रशासन में संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व की बात की गई है लेकिन यह संकल्पना अभी अधूरी है इसलिए हम सबको मिलकर एक बार फिर से संघर्ष के लिए तैयार होना होगा क्योंकि गैर बराबरी की व्यवस्था ढाई हजार वर्षों से इस देश में चली आ रही है इसलिए संविधान की बातों को लागू करने में उन्होंने कई अड़चनें पैदा की है
मैं उन सभी संविधानवादीयोसे और बराबरी की व्यवस्था को मानने वाले लोगों से निवेदन कर कह रहा हूं कि यदि आप लोग संविधान के मूल भावना के अनुरूप समता स्वतंत्रता बंधुता और न्याय के आधार पर दे सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण कर राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं तो हम सबको संगठित होकर अभी भी संघर्ष करने की जरूरत है



