पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तुर्रा धाम जनकल्याण समिति का अहम फैसला
शनिवार भंडारे में प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध, अब स्टील के बर्तनों में होगा प्रसाद वितरण
कोतमा/अनूपपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तुर्रा धाम जनकल्याण समिति ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक सराहनीय और प्रेरणादायक निर्णय लिया है। समिति ने प्रत्येक शनिवार आयोजित होने वाले भंडारे में उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक एवं डिस्पोजल सामग्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 22 जनवरी 2022 से तुर्रा धाम में निरंतर प्रत्येक शनिवार विशाल भंडारा एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। पिछले चार वर्षों से बिना किसी व्यवधान के जारी यह सेवा कार्य क्षेत्र में आस्था और सामाजिक समर्पण का एक अनूठा उदाहरण बन चुका है।
भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के कारण दोना-पत्तल, प्लास्टिक के गिलास, चम्मच एवं अन्य डिस्पोजल सामग्री का उपयोग किया जाता था, जिससे काफी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता था। यह कचरा पर्यावरण के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ आवारा पशुओं, विशेषकर गौवंश के लिए भी नुकसानदायक साबित हो रहा था।
इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने निर्णय लिया है कि अब तुर्रा धाम में प्रत्येक शनिवार होने वाले भंडारे में प्लास्टिक और डिस्पोजल सामग्री का उपयोग पूरी तरह बंद रहेगा। इसके स्थान पर स्टील के बर्तन, थाली, कटोरी और चम्मच का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी और स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा।
समिति का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना समय की आवश्यकता है। यदि छोटे-छोटे स्तर पर भी ऐसे प्रयास किए जाएं तो प्लास्टिक प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पर्यावरण के लिए बनेगी मिसाल
तुर्रा धाम जनकल्याण समिति का यह निर्णय न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि अन्य सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। स्थानीय लोगों ने समिति की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे समाजहित और पर्यावरणहित में लिया गया अनुकरणीय निर्णय बताया है।
समिति ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने दैनिक जीवन में एकल-उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग कम करें तथा पुनः उपयोग किए जा सकने वाले बर्तनों एवं वस्तुओं को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
