केवई नदी को बचाने के लिए युवाओं का 'जल सत्याग्रह', चंगेरी में उठी विरोध की लहर

(कोतमा) केवई नदी के अस्तित्व और क्षेत्र में गहराते जल संकट को लेकर आज चंगेरी में युवाओं ने अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। अनूपपुर थर्मल पावर कंपनी (अडानी समूह) द्वारा नदी पर बनाए गए बैराजों और अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ युवाओं ने 'जल सत्याग्रह' शुरू कर दिया है।
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आंदोलन की मुख्य वजहें

आंदोलनकारियों का आरोप है कि अडानी पावर प्लांट द्वारा छतई में बनाए गए बैराज और भविष्य में प्रस्तावित 8 अन्य बैराजों के कारण आने वाले समय में कोतमा क्षेत्र पूरी तरह से जल विहीन हो जाएगा। इसके साथ ही:
केवई नदी में नियमों को ताक पर रखकर रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है।
नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है, जिससे भविष्य में खेती और पेयजल का संकट खड़ा होना तय है।
राजनीतिक दलों का मिला समर्थन
युवाओं के इस आंदोलन को व्यापक जन समर्थन मिल रहा है। आज सत्याग्रह स्थल पर अनुज गौतम के साथ युवा साथी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के दर्जनों सदस्य, पूर्व पार्षद देवशरण सिंह और कांग्रेस नेता व जिला पंचायत सदस्य रिंकू रामजी मिश्रा पहुंचे। आप सभी ने ने युवाओं की मांगों को जायज ठहराते हुए प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया।
"यह केवल आज की लड़ाई नहीं है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के पानी को बचाने का संघर्ष है। अगर आज बैराजों का निर्माण एवं अवैध उत्खनन नहीं रुका, तो कोतमा मरुस्थल बन जाएगा।"
— आंदोलन समर्थकों का सामूहिक स्वर

प्रशासनिक पहल विफल, सत्याग्रह जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोतमा मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, युवा अपनी मांगों पर अडिग रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक प्रशासन इन समस्याओं के समाधान हेतु लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक वे नदी से बाहर नहीं निकलेंगे।
देर शाम तक युवा पानी के भीतर खड़े होकर जल सत्याग्रह करते रहे, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन जनहित में ठोस कदम उठाता है या विकास के नाम पर नदी के दोहन का यह खेल जारी रहता है।