' कावड़  यात्रियों में नाबालिग बच्चे और नि: शुल्क यात्रा करने वाले ही कयो '

इस समय जगह - जगह आपको काबड यात्रा करने वाले बडी संखया में कही भी आसानी से देखने को मिल जायेंगे ?

 काबड यात्रा एक धार्मिक अयोजन है और किसी भी धार्मिक अयोजन का होना बुरी बात भी नही है ?बुरी बात है उसमें होने वाली कुरुतियों का होना और वह भी खुल्लम खुला सार्वजनिक स्थानों पर होना ? जानकारी अनुसार किसी भी धार्मिक अयोजन करने पर उसे विधि विधान से करने के लिए किसी पंडित के द्वारा पूजा पाठ कर ही श्री गणेश किया जाता है ? और इसके लिए पंडित जी वाकायदा दक्षिणा भी लेते है ? अब यहा यह सबाल उठता है की जब काबड यात्रा भी एक धार्मिक अयोजन है तो फिर उसमें शमिल लोगों को पारिश्रमिक कयो नही दिया जाता है ? वही दूसरी और इस धार्मिक अयोजन में नाबालिग बच्चो को आगे लाने की कया वजह होती है ? कही ऐसा तो नही की इसमे शामिल करने पर कुछ भी मेहनताना देना वचाना भर हो ? जबकि उस समय स्कूल की कोई घुट्टी भी नही होती है ?कही ऐसा तो नही की इस धार्मिक अयोजन कावड यात्रा में बड़ी संखया में बच्चों को शामिल कर उनहे शिक्षा से बचित करने की कोई मनशा हो ? और एक तीर से दो निशाने साधते हुए देश के भविष्य को ही अंधकार मय करने की साजिश को अजाम दिया जा रहा हो ? सच्चाई चाहे जो भी कयो ना हो बुद्धि जीवी देश के नागरिकों को इस पर आपति है ?