जयसिंहनगर क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंप पर 'नो स्टॉक' का खेल,ग्रामीण क्षेत्रों में 220 रुपये लीटर तक कालाबाजारी

​स्टॉक रहते हुए भी उपभोक्ताओं को लौटाया जा रहा वापस,

 जनता में भारी आक्रोश
​ग्रामीण अंचलों में ऊंचे दामों पर बिक रहा पेट्रोल, जिम्मेदार मौन

​जयसिंहनगर शहडोल जिले के तहसील मुख्यालय जयसिंहनगर अंतर्गत बांदा बाजार स्थित पेट्रोल पंप इन दिनों क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों और उपभोक्ताओं का आरोप है कि पेट्रोल पंप प्रबंधन के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन का स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद, आम ग्राहकों को पेट्रोल देने से साफ मना किया जा रहा है। पेट्रोल पंप पर गाड़ियां लेकर पहुंच रहे लोगों को 'पेट्रोल नहीं है' कहकर बैरंग लौटाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

​छोटे व्यापारियों की चांदी, ग्रामीण क्षेत्रों में खुली लूट
​एक तरफ जहां मुख्य पेट्रोल पंप से आम जनता को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में पेट्रोल की भारी कालाबाजारी पैर पसार चुकी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जयसिंहनगर क्षेत्र के छोटे किराना व्यापारी और अवैध विक्रेता पेट्रोल पंप प्रबंधन की कथित मिलीभगत से भारी मात्रा में ईंधन का भंडारण कर रहे हैं।

​इसके बाद इसी पेट्रोल को ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में 150 रुपये से लेकर 220 रुपये प्रति लीटर तक के मनमाने दामों पर खुलेआम बेचा जा रहा है। मजबूरी में ग्रामीणों को अपनी गाड़ियों के लिए इतनी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

​आखिर कौन है इस खेल का जिम्मेदार?
​इस पूरे गोरखधंधे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र की जनता अब सीधे तौर पर कुछ सुलगते सवाल पूछ रही है

​पेट्रोल पंप प्रबंधन की भूमिका - जब पंप पर पेट्रोल उपलब्ध है, तो उसे आम उपभोक्ताओं को न देकर किसे और क्यों छुपा कर रखा जा रहा है? क्या यह कृत्रिम किल्लत जानबूझकर पैदा की जा रही है?

​खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की निष्क्रियता- क्षेत्र में इतनी बड़ी तादाद में ईंधन की कालाबाजारी हो रही है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। आखिर इन कालाबाजारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है?

​उपभोक्ताओं का कहना है -
"हम घंटो लाइन में खड़े रहते हैं तो कह दिया जाता है कि पेट्रोल खत्म है। लेकिन वहीं बगल के गांवों में डिब्बों और बोतलों में भरकर डबल रेट पर पेट्रोल आसानी से मिल जाता है। यह सीधे तौर पर हमारी जेब पर डाका है और प्रशासन सो रहा है।"