एसईसीएल की जमीन पर अवैध कब्जे पर बड़ी कार्रवाई सार्वजनिक विधिक इश्तिहार जारी
अमित सेन गुप्ता
अनूपपुर! अनूपपुर जिले में एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। संपदा अधिकारी न्यायालय, एसईसीएल जमुना टाउनशिप द्वारा सरकारी स्थान (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत बेदखली एवं ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया है।
*ऑर्डर लेने से किया इंकार*
23 मई 2026 को संपदा अधिकारी कार्यालय द्वारा सार्वजनिक विधिक इश्तिहार जारी किया गया, जिसमें संबंधित प्रकरणों की जानकारी प्रकाशित करते हुए आदेशों की वैधानिक तामिली की पुष्टि की गई। इश्तिहार में उल्लेख है कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा ऑर्डर प्राप्त करने से इंकार किए जाने के बाद आदेशों की प्रतियां भवनों पर चस्पा की गईं तथा डाक विभाग के माध्यम से भी भेजी गईं। खसरा नंबर 143 की भूमि पर कब्जे का मामला प्रकरण क्रमांक 10/2026 के अनुसार ग्राम पसान स्थित खसरा नंबर 143 की भूमि, जो एसईसीएल के स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन सार्वजनिक परिसर की श्रेणी में आती है, पर नारायण सिंह पिता स्व. गंगा सिंह द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा एवं निर्माण किया गया था।
*जांच में क्या मिला*
जांच में सामने आया कि केंद्रीय विद्यालय जमुना कॉलरी के समीप बिना वैध अनुमति मकान निर्माण कर कब्जा स्थापित किया गया था और संबंधित परिवार वहां निवास कर रहा था।
*वैध दस्तावेज नहीं किए प्रस्तुत*
संपदा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा भूमि पर वैध स्वामित्व, पट्टा, आवंटन आदेश अथवा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। केवल आधार कार्ड, स्थानीय पहचान पत्र या लंबे समय से निवास करना किसी सार्वजनिक परिसर पर वैध अधिकार साबित नहीं करता।
*प्राकृतिक न्याय का पालन*
22 अप्रैल 2026 को नोटिस जारी कर संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया गया, लेकिन वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कब्जे को “अनधिकृत अधिभोग” माना गया।
*15 दिन में खाली करने के निर्देश*
आदेश के अनुसार 15 दिनों के भीतर परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। अनुपालन नहीं होने की स्थिति में बल प्रयोग कर बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
*अवैध निर्माण हटाने का आदेश*
साथ ही अवैध निर्माण हटाने एवं परिसर को मूल स्थिति में पुनर्स्थापित करने का भी आदेश जारी किया गया है। स्वयं निर्माण नहीं हटाने पर एसईसीएल प्रशासन कार्रवाई कर खर्च की वसूली करेगा।


