बिरूल बाजार पंचायत में RTI नियमों की अनदेखी, 30 लाख से अधिक के खर्च पर उठे सवाल

प्रधान संपादक - सुरेंद्र मेहरा 

​जनपद CEO के आदेश को भी सचिव ने दिखाया ठेंगा, बिना सत्यापन के थमाए दस्तावेज; राज्य सूचना आयोग और कलेक्टर से शिकायत की तैयारी
​बैतूल (पट्टन)।

विकासखंड पट्टन के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिरूल बाजार में विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितता और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी छिपाने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत के लोक सूचना अधिकारी/सचिव पर तानाशाही रवैया अपनाने और जनपद पंचायत सीईओ के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करने के आरोप लगे हैं।

​नियमों को ताक पर रखकर दी अधूरी व असत्यापित जानकारी

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक आवेदक द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत डाक के माध्यम से पंचायत से विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी मांगी गई थी। आवेदक ने नियमानुसार गरीबी रेखा (BPL) राशन कार्ड की प्रति भी संलग्न की थी, जिसके तहत 50 पृष्ठों तक की जानकारी निःशुल्क एवं प्रमाणित रूप में उपलब्ध कराई जानी थी।
​आरोप है कि सचिव ने नियमों को दरकिनार करते हुए केवल 43 पृष्ठों की जानकारी दी। इसमें भी मात्र 8 पृष्ठ ही सत्यापित किए गए, जबकि शेष 35 पृष्ठ बिना किसी सत्यापन/प्रमाणीकरण के थमा दिए गए। असत्यापित दस्तावेज देने से पंचायत के कामकाज और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
​23 भुगतानों में ₹30 लाख से अधिक का खर्च, संदेहास्पद बिलिंग
​उपलब्ध कराए गए अपूर्ण दस्तावेजों से ही पंचायत में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। प्राप्त रिकॉर्ड के मुताबिक:
​कुल 23 भुगतानों में 30 लाख 33 हजार रुपये से अधिक का व्यय दर्शाया गया है।

​एक ही दुकान से स्टेशनरी, बैनर आदि मद में ₹96,650 का बिल भुगतान किया गया।

​दूसरी दुकान से डिजिटल फोटो आदि के नाम पर चार किस्तों में ₹38,350 का भुगतान दर्शाया गया है।
​जानकारों का कहना है कि यदि पूरे 50 पृष्ठों की विधिवत और सत्यापित जानकारी दी जाती, तो खर्च और बिलिंग में और भी बड़ी अनियमितताएं उजागर हो सकती थीं।

​राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और जांच की मांग

​सचिव के इस टालमटोल और संदिग्ध रवैये के खिलाफ आवेदक ने अब उच्च स्तर पर मोर्चा खोलने का फैसला किया है। आवेदक का कहना है कि मामले की द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में दायर की जा रही है। साथ ही, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई हेतु जिला पंचायत सीईओ एवं कलेक्टर बैतूल को औपचारिक लिखित शिकायत सौंपी जा रही है।