जयसिंहनगर (शहडोल)। -  ग्राम पंचायत पोंडी़कलाॅ में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के बंदरबांट का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ पोंडी़कलाॅ से ददराटोला पहुंच मार्ग पर बनाई गई 100 मी अंतर्गत तीन पुल भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक और निरीक्षण अधिकारी की मिलीभगत से नियम-कायदों को ताक पर रखकर घटिया निर्माण कराया गया है।

तकनीकी मापदंडों की धज्जियां उड़ाईं

ग्रामीणों ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि लगभग 100 मीटर के निर्माण के अंतराल पर तीन पुल में भारी अनियमितता बरती गई है। कागजोंमोटा पुल के नीम की गहराई डेढ़ मीटर दर्शायी गई है, जबकि मौके पर इसकी वास्तविक 2 फीट गहराई ही पाई गई है। घटिया पत्थर बन चुका सीमेंट एक्सपायरी वाला लगाया गया और 8 एमएम की सरिया का 200 एम एम के डिस्टेंस पर लगाया गया इस प्रकार से घटिया सामग्री के उपयोग के कारण पुल अभी से जगह-जगह से खराब होने  लगी है।

मजदूरों का हक मार मशीनों से कराया काम

पंचायत राज व्यवस्था में मजदूरों को रोजगार देने के प्रावधानों का यहाँ खुला उल्लंघन हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि काम में स्थानीय मजदूरों के बजाय जेसीबी (JCB) और कंक्रीट मिक्सर मशीनों का उपयोग कर अर्धरात्रि में निर्माण कार्य किया गया। नियमानुसार मौके पर कार्य की जानकारी देने वाला डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य है, लेकिन भ्रष्टाचार को छिपाने के उद्देश्य से यहाँ कोई बोर्ड नहीं लगाया गया।

*पंचों के फर्जी हस्ताक्षर और डराने-धमकाने का आरोप*

हैरानी की बात यह है कि पंचायत के पंचों को भी अंधेरे में रखा गया है। पंचों ने आरोप लगाया कि उन्हें किसी भी निर्माण कार्य या उसकी लागत की जानकारी नहीं दी जाती। प्रस्तावों में बिना जानकारी के हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। जब कोई पंच इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे डरा-धमकाकर चुप करा दिया जाता है।

कलेक्टर से जांच की मांग

ग्रामीणों ने इस मामले में जिला कलेक्टर और उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की बारीकी से जांच की जाए, तो लाखों रुपये का गबन उजागर हो सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाई करता है या फिर दोषियों को संरक्षण मिलता रहेगा।