अमलाई ओसीएम खुली खदान में पोस्टिंग को लेकर मचा घमासान! आदेशों पर भारी पड़ रही चरण वंदना, मनचाही कुर्सी बचाने की जुगत में कर्मचारी
एसईसीएल सोहागपुर एरिया में पदस्थापना आदेशों की उड़ रही धज्जियां? प्रबंधन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल, वर्षों से जमे कर्मचारियों की मनमानी बनी चर्चा का विषय
सोहागपुर एरिया
एसईसीएल सोहागपुर एरिया अंतर्गत हाल ही में जारी किए गए टेक्निकल इंस्पेक्टर एवं सहायक टेक्निकल इंस्पेक्टर्स के स्थानांतरण एवं पदस्थापना आदेशों ने पूरे क्षेत्र में नई बहस को जन्म दे दिया है। महाप्रबंधक कार्यालय से लेकर उपक्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय और अब चौक-चौराहों से लेकर पान ठेलों तक एक ही चर्चा सुनाई दे रही है—क्या वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेशों का अब कोई महत्व नहीं रह गया है?
सूत्रों के अनुसार लंबे समय से एक ही कार्यस्थल पर जमे कुछ कर्मचारियों को प्रशासनिक आवश्यकता के तहत अमलाई ओसीएम खुली खदान, सांगवा साइडिंग, खैरहा माइंस सहित अन्य इकाइयों में नई पदस्थापना दी गई थी। आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारियों को नए कार्यस्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने भी भेज दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कुछ कर्मचारी कथित तौर पर अपनी पुरानी और सुविधाजनक पदस्थापना बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
बताया जाता है कि स्थानांतरण से असंतुष्ट कर्मचारी अब विभिन्न श्रमिक संगठनों के नेताओं और प्रभावशाली अधिकारियों के इर्द-गिर्द घूमकर अपने लिए पुनः अनुकूल आदेश कराने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण विकसित हुई सुविधाएं और कथित "जुगाड़ व्यवस्था" कहीं समाप्त न हो जाए, इसी आशंका के चलते पदस्थापना आदेशों को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अमलाई ओसीएम बना चर्चा का केंद्र
अमलाई ओसीएम खुली खदान में भी पदस्थापना को लेकर असंतोष और खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यदि मुख्यालय स्तर से सोच-समझकर प्रशासनिक आदेश जारी किए गए हैं, तो फिर उन आदेशों को लागू कराने में इतनी कठिनाई क्यों आ रही है? क्या कुछ कर्मचारी स्वयं को व्यवस्था से ऊपर समझने लगे हैं?
आदेश जारी, फिर भी वापसी की कवायद क्यों?
क्षेत्र में यह प्रश्न भी जोर पकड़ रहा है कि जब कर्मचारियों को नई जगह पदस्थ कर दिया गया और वे वहां पहुंच भी गए, तो फिर पुराने स्थान पर वापसी के लिए सिफारिशों का दौर क्यों शुरू हो गया? क्या प्रबंधन द्वारा मिलने वाला नियमित वेतन पर्याप्त नहीं है, या फिर कुछ विशेष कार्यस्थलों से जुड़े ऐसे लाभ हैं जिन्हें छोड़ने की इच्छा नहीं है?
प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
यदि पदस्थापना आदेश जारी होने के बाद भी उन्हें प्रभावित करने अथवा बदलवाने की कोशिशें सफल होती हैं, तो इससे प्रबंधन की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक दृढ़ता पर भी प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। कर्मचारियों के बीच यह संदेश जा सकता है कि नियमों और आदेशों से अधिक प्रभाव, पहुंच और चरण वंदना का महत्व है।
क्या मुख्यालय के आदेश केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी आदेश अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित होकर रह गए हैं? यदि किसी कर्मचारी को अपनी पसंद के अनुसार ही कार्यस्थल चुनना है, तो फिर पदस्थापना प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था का औचित्य क्या रह जाता है?
फिलहाल पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं। वास्तविक स्थिति और तथ्य तब सामने आएंगे जब प्रबंधन स्पष्ट रूप से बताएगा कि जारी आदेशों का पूर्ण पालन कराया जाएगा या फिर प्रभाव और सिफारिशों के दबाव में पदस्थापनाओं में फेरबदल किया जाएगा। तब तक सोहागपुर एरिया में यह मामला जनचर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
